# Tags
#Lifestyle

Engineers Day 2026: 48°C गर्मी में देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहे इंजीनियर

Engineers Day 2026

इंजीनियर्स डे विशेष: 48 डिग्री गर्मी और रेतीले तूफानों के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दे रहे इंजीनियर

Engineers Day 2026 पर जानिए बाड़मेर के रेगिस्तानी तेल एवं गैस क्षेत्रों में इंजीनियर कैसे तकनीक, ड्रिलिंग और ऑटोमेशन से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहे हैं। राजस्थान के बाड़मेर में वेदांता ऑयल एंड गैस के इंजीनियर कठिन रेगिस्तानी परिस्थितियों में ड्रिलिंग, ऑटोमेशन, उत्पादन और सुरक्षा के जरिए भारत की घरेलू ऊर्जा क्षमता को मजबूत बनाने में जुटे हैं।

भारत में इंजीनियर्स डे 15 सितंबर को मनाया जाता है। बाड़मेर के तेल एवं गैस क्षेत्रों में इंजीनियर अत्यधिक गर्मी, रेतीले तूफानों और दूरस्थ कार्यस्थलों के बीच ड्रिलिंग, उत्पादन, ऑटोमेशन और सुरक्षा के माध्यम से देश की घरेलू ऊर्जा क्षमता को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं।

Hindustan Enews | Leading Online News Portal

Engineers Day 2026
Engineers Day 2026

48 डिग्री गर्मी में ऊर्जा सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे इंजीनियर

बाड़मेर, 14 सितंबर। राजस्थान के बाड़मेर में गर्मियों के दौरान तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। धूल भरे रेतीले तूफान, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और शहरों से दूर स्थित कार्यस्थल यहां ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियरों के लिए रोजमर्रा की चुनौतियां हैं। इसके बावजूद वेदांता ऑयल एंड गैस के इंजीनियर दिन-रात तकनीकी दक्षता, नवाचार और टीमवर्क के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रहे हैं।

इंजीनियर्स डे के अवसर पर इन इंजीनियरों की भूमिका इस बात को रेखांकित करती है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा केवल संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उन्हें सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ तरीके से विकसित करने वाली तकनीकी विशेषज्ञता पर भी निर्भर है।

राजस्थान के रेगिस्तानी तेल एवं गैस क्षेत्रों में कार्यरत इंजीनियर भूगर्भीय चुनौतियों, अत्यधिक तापमान और जटिल परिचालन परिस्थितियों के बीच घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

मयंक कुमार: ड्रिलिंग इंजीनियर के रूप में ऊर्जा संसाधनों को विकास से जोड़ने की कोशिश

राजस्थान के केयर्न आरजे साउथ गैस क्षेत्र में कार्यरत युवा ड्रिलिंग इंजीनियर मयंक कुमार उन इंजीनियरों में शामिल हैं, जो धरती की गहराइयों में मौजूद ऊर्जा संसाधनों को देश की विकास आवश्यकताओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

ड्रिलिंग कार्य में बदलती भूगर्भीय परिस्थितियों, तकनीकी जटिलताओं और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे वातावरण में इंजीनियरिंग निर्णयों की सटीकता, सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन और टीम के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

मयंक के अनुसार, सामान्य इंजीनियरिंग से यह समझने में मदद मिलती है कि विभिन्न प्रणालियां कैसे काम करती हैं, जबकि पेट्रोलियम इंजीनियरिंग धरती की गहराइयों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की खोज और उनके विकास का अवसर देती है।

उनका मानना है कि ड्रिलिंग साइट पर किया गया प्रत्येक कार्य देश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक विकास से जुड़ा है। घरेलू तेल एवं गैस संसाधनों का विकास भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Engineers Day 2026
Engineers Power India’s Energy Future

प्रांजीत कलिता: ऑटोमेशन और स्मार्ट तकनीक से बदल रहा ऊर्जा क्षेत्र

बाड़मेर के रागेश्वरी ऑयल फील्ड में कार्यरत युवा इंजीनियर प्रांजीत कलिता ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक और ऑटोमेशन के बढ़ते महत्व का उदाहरण हैं।

इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग में कार्यरत प्रांजीत फील्ड इंस्ट्रुमेंटेशन, प्रोसेस ऑटोमेशन और कंट्रोल सिस्टम्स से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालते हैं। तेल एवं गैस उद्योग में ये प्रणालियां परिचालन की निगरानी, प्रक्रिया नियंत्रण, दक्षता और सुरक्षा को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रांजीत का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में काम करने का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां इंजीनियरिंग का सीधा संबंध देश की प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा से है।

उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में नवाचार, ऑटोमेशन और स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियां भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को गति दे सकती हैं। इस बदलाव में इंजीनियरों की तकनीकी क्षमता और समस्या-समाधान कौशल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

वेदांता ऑयल एंड गैस में 650 से अधिक इंजीनियर कार्यरत

उपलब्ध कंपनी जानकारी के अनुसार, वेदांता ऑयल एंड गैस के 650 से अधिक इंजीनियर विभिन्न तकनीकी और परिचालन क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

इंजीनियरिंग क्षेत्र प्रमुख कार्य
ड्रिलिंग कुओं की ड्रिलिंग, तकनीकी योजना और परिचालन प्रबंधन
प्रोडक्शन तेल एवं गैस उत्पादन को सुरक्षित और कुशल बनाना
सबसर्फेस भूमिगत संसाधनों का अध्ययन और विकास योजना
मैकेनिकल उपकरणों और यांत्रिक प्रणालियों की विश्वसनीयता
इंस्ट्रुमेंटेशन मापन, नियंत्रण और प्रक्रिया निगरानी
डिजिटल डेटा, डिजिटल टूल्स और तकनीकी प्रणालियों का उपयोग
प्रोजेक्ट्स ऊर्जा परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन
HSE स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का पालन

राजस्थान के रेगिस्तानी तेल एवं गैस क्षेत्रों से लेकर देश की अपतटीय ऊर्जा परिसंपत्तियों तक, इंजीनियर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन क्षमता, परिचालन दक्षता और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।

युवा इंजीनियरों की बढ़ती भागीदारी से मजबूत हो रही तकनीकी क्षमता

कंपनी के अनुसार, उसकी इंजीनियरिंग टीम का एक बड़ा हिस्सा युवा पेशेवरों से बना है। 60 प्रतिशत से अधिक इंजीनियर 35 वर्ष या उससे कम आयु वर्ग के हैं।

यह आंकड़ा ऊर्जा क्षेत्र में नई पीढ़ी के तकनीकी पेशेवरों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। युवा इंजीनियर डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन, डेटा-आधारित निर्णय और आधुनिक परिचालन प्रणालियों के माध्यम से उद्योग में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी ऊर्जा क्षेत्र के बदलते कार्यबल की ओर संकेत करती है। इससे इंजीनियरिंग और ऊर्जा उद्योग में विविधता, नए दृष्टिकोण और प्रतिभा के व्यापक उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है।

90 ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी और 10 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की नियुक्ति

कंपनी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 90 ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी और कैंपस भर्ती के माध्यम से तकनीकी क्षमता को मजबूत किया गया।

इसके अतिरिक्त, वैश्विक अनुभव और विशेषज्ञता को संगठन से जोड़ने के लिए 10 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।

यह पहल तकनीकी कौशल विकास, अनुभवी पेशेवरों के ज्ञान और नई पीढ़ी के इंजीनियरों के प्रशिक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में इंजीनियरों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में घरेलू तेल एवं गैस संसाधनों का कुशल विकास, उत्पादन प्रणालियों का आधुनिकीकरण और ऊर्जा परिसंपत्तियों का सुरक्षित संचालन महत्वपूर्ण हो जाता है।

इंजीनियर इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर योगदान देते हैं:

  1. ऊर्जा संसाधनों की खोज और विकास: भूगर्भीय एवं तकनीकी जानकारी के आधार पर संसाधनों के विकास में सहायता।
  2. उत्पादन क्षमता में सुधार: आधुनिक उपकरणों और प्रक्रियाओं के माध्यम से परिचालन दक्षता बढ़ाना।
  3. ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक: निगरानी, नियंत्रण और डेटा-आधारित निर्णयों को बेहतर बनाना।
  4. सुरक्षा और पर्यावरण: HSE मानकों के जरिए सुरक्षित और जिम्मेदार परिचालन सुनिश्चित करना।
  5. तकनीकी नवाचार: कठिन परिस्थितियों में नई तकनीकों और समाधान विकसित करना।

हालांकि, ऊर्जा आत्मनिर्भरता एक व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य है, जिसमें घरेलू उत्पादन के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, भंडारण, आयात विविधीकरण और अन्य क्षेत्रों का भी योगदान होता है।

निष्कर्ष: इंजीनियरिंग से ऊर्जा सुरक्षा तक

इंजिनियर्स डे पर बाड़मेर के रेगिस्तानी क्षेत्रों में कार्यरत इंजीनियरों की कहानी यह दिखाती है कि तकनीकी विशेषज्ञता, नवाचार और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

मयंक कुमार जैसे ड्रिलिंग इंजीनियर और प्रांजीत कलिता जैसे इंस्ट्रुमेंटेशन एवं ऑटोमेशन विशेषज्ञ ऊर्जा क्षेत्र की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हुए घरेलू संसाधनों के विकास में योगदान दे रहे हैं।

48 डिग्री गर्मी, रेतीले तूफानों और दूरस्थ कार्यस्थलों के बीच उनका कार्य केवल एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास भी है।

FAQ: Engineers Day 2026 और बाड़मेर के ऊर्जा इंजीनियर

1. Engineers Day 2026 कब मनाया जाता है?

भारत में इंजीनियर्स डे हर वर्ष 15 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान अभियंता और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।

2. बाड़मेर के इंजीनियर किन परिस्थितियों में काम करते हैं?

बाड़मेर के तेल एवं गैस क्षेत्रों में इंजीनियरों को अत्यधिक गर्मी, धूल भरे रेतीले तूफानों, दूरस्थ कार्यस्थलों और जटिल तकनीकी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।

3. वेदांता ऑयल एंड गैस में कितने इंजीनियर कार्यरत हैं?

कंपनी द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, वेदांता ऑयल एंड गैस में 650 से अधिक इंजीनियर विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

4. मयंक कुमार किस क्षेत्र में कार्यरत हैं?

मयंक कुमार राजस्थान के केयर्न आरजे साउथ गैस क्षेत्र में ड्रिलिंग इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं।

5. प्रांजीत कलिता का कार्यक्षेत्र क्या है?

प्रांजीत कलिता बाड़मेर के रागेश्वरी ऑयल फील्ड में इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग से जुड़े हैं और फील्ड इंस्ट्रुमेंटेशन, प्रोसेस ऑटोमेशन तथा कंट्रोल सिस्टम्स पर कार्य करते हैं।

6. ऊर्जा क्षेत्र में इंजीनियरों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

इंजीनियर ऊर्जा संसाधनों की खोज, ड्रिलिंग, उत्पादन, ऑटोमेशन, उपकरणों की विश्वसनीयता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

7. कंपनी की इंजीनियरिंग टीम में युवाओं की भागीदारी कितनी है?

कंपनी के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक इंजीनियर 35 वर्ष या उससे कम आयु के हैं।

8. वित्त वर्ष 2025-26 में कितने ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी भर्ती किए गए?

कंपनी की साझा जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 90 ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी और कैंपस भर्ती के माध्यम से तकनीकी क्षमता को मजबूत किया गया।

9. भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में घरेलू तेल एवं गैस का क्या महत्व है?

घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, आयात पर निर्भरता को संतुलित करने और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा मजबूत करने में योगदान दे सकता है। हालांकि, ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता सहित कई क्षेत्रों का विकास भी आवश्यक है।

आधिकारिक लिंक: